महाभारत 3.13.46
साध्यानामपि देवानां वसूनामीश्वरेश्वरःलोकभावन लोकेश यथा त्वां नारदोऽब्रवीत्
sādhyānāmapi devānāṃ vasūnāmīśvareśvaraḥlokabhāvana lokeśa yathā tvāṃ nārado'bravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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