महाभारत 3.13.52
सा तेऽहं दुःखमाख्यास्ये प्रणयान्मधुसूदनईशस्त्वं सर्वभूतानां ये दिव्या ये च मानुषाः
sā te'haṃ duḥkhamākhyāsye praṇayānmadhusūdanaīśastvaṃ sarvabhūtānāṃ ye divyā ye ca mānuṣāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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