महाभारत 3.13.63
नन्विमे शरणं प्राप्तान्न त्यजन्ति कदाचनते मां शरणमापन्नां नान्वपद्यन्त पाण्डवाः
nanvime śaraṇaṃ prāptānna tyajanti kadācanate māṃ śaraṇamāpannāṃ nānvapadyanta pāṇḍavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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