महाभारत 3.13.72
भोजने भीमसेनस्य पापः प्राक्षेपयद्विषम्कालकूटं नवं तीक्ष्णं संभृतं लोमहर्षणम्
bhojane bhīmasenasya pāpaḥ prākṣepayadviṣamkālakūṭaṃ navaṃ tīkṣṇaṃ saṃbhṛtaṃ lomaharṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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