महाभारत 3.13.80
हा हतास्मि कुतो न्वद्य भवेच्छान्तिरिहानलात्अनाथा विनशिष्यामि बालकैः पुत्रकैः सह
hā hatāsmi kuto nvadya bhavecchāntirihānalātanāthā vinaśiṣyāmi bālakaiḥ putrakaiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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