महाभारत 3.13.95
गृहीतं पाणिना पाणिं भीमसेनोऽथ रक्षसानामृष्यत महाबाहुस्तत्राक्रुध्यद्वृकोदरः
gṛhītaṃ pāṇinā pāṇiṃ bhīmaseno'tha rakṣasānāmṛṣyata mahābāhustatrākrudhyadvṛkodaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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