महाभारत 3.130.16
समाधीनां समासस्तु पाण्डवेय श्रुतस्त्वयातं द्रक्ष्यसि महाराज भृगुतुङ्गं महागिरिम्
samādhīnāṃ samāsastu pāṇḍaveya śrutastvayātaṃ drakṣyasi mahārāja bhṛgutuṅgaṃ mahāgirim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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