महाभारत 3.130.1
लोमश उवाच · lomaśa uvāca
इह मर्त्यास्तपस्तप्त्वा स्वर्गं गच्छन्ति भारतमर्तुकामा नरा राजन्निहायान्ति सहस्रशः
iha martyāstapastaptvā svargaṃ gacchanti bhāratamartukāmā narā rājannihāyānti sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें