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महाभारत 3.131.17
श्येन उवाच · śyena uvāca
न वराहं न चोक्षाणं न मृगान्विविधांस्तथाभक्षयामि महाराज किमन्नाद्येन तेन मे
na varāhaṃ na cokṣāṇaṃ na mṛgānvividhāṃstathābhakṣayāmi mahārāja kimannādyena tena me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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