महाभारत 3.131.27
न विद्यते यदा मांसं कपोतेन समं धृतम्तत उत्कृत्तमांसोऽसावारुरोह स्वयं तुलाम्
na vidyate yadā māṃsaṃ kapotena samaṃ dhṛtamtata utkṛttamāṃso'sāvāruroha svayaṃ tulām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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