महाभारत 3.131.29
यत्ते मांसानि गात्रेभ्य उत्कृत्तानि विशां पतेएषा ते भास्वरी कीर्तिर्लोकानभिभविष्यति
yatte māṃsāni gātrebhya utkṛttāni viśāṃ pateeṣā te bhāsvarī kīrtirlokānabhibhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें