महाभारत 3.131.2
विहितं भक्षणं राजन्पीड्यमानस्य मे क्षुधामा भाङ्क्षीर्धर्मलोभेन धर्ममुत्सृष्टवानसि
vihitaṃ bhakṣaṇaṃ rājanpīḍyamānasya me kṣudhāmā bhāṅkṣīrdharmalobhena dharmamutsṛṣṭavānasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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