महाभारत 3.131.32
अत्र वै सततं देवा मुनयश्च सनातनाःदृश्यन्ते ब्राह्मणै राजन्पुण्यवद्भिर्महात्मभिः
atra vai satataṃ devā munayaśca sanātanāḥdṛśyante brāhmaṇai rājanpuṇyavadbhirmahātmabhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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