महाभारत 3.131.8
भक्ष्याद्विलोपितस्याद्य मम प्राणा विशां पतेविसृज्य कायमेष्यन्ति पन्थानमपुनर्भवम्
bhakṣyādvilopitasyādya mama prāṇā viśāṃ patevisṛjya kāyameṣyanti panthānamapunarbhavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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