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महाभारत 3.134.13
बन्द्युवाचसप्त ग्राम्याः पशवः सप्त वन्याः; सप्त छन्दांसि क्रतुमेकं वहन्तिसप्तर्षयः सप्त चाप्यर्हणानि; सप्ततन्त्री प्रथिता चैव वीणा
bandyuvācasapta grāmyāḥ paśavaḥ sapta vanyāḥ; sapta chandāṃsi kratumekaṃ vahantisaptarṣayaḥ sapta cāpyarhaṇāni; saptatantrī prathitā caiva vīṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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