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महाभारत 3.134.30
अष्टावक्र उवाच · aṣṭāvakra uvāca
नानेन जीवता कश्चिदर्थो मे बन्दिना नृपपिता यद्यस्य वरुणो मज्जयैनं जलाशये
nānena jīvatā kaścidartho me bandinā nṛpapitā yadyasya varuṇo majjayainaṃ jalāśaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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