महाभारत 3.135.13
रैभ्यस्य तु सुतावास्तामर्वावसुपरावसूआसीद्यवक्रीः पुत्रस्तु भरद्वाजस्य भारत
raibhyasya tu sutāvāstāmarvāvasuparāvasūāsīdyavakrīḥ putrastu bharadvājasya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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