महाभारत 3.135.9
एष रैभ्याश्रमः श्रीमान्पाण्डवेय प्रकाशतेभारद्वाजो यत्र कविर्यवक्रीतो व्यनश्यत
eṣa raibhyāśramaḥ śrīmānpāṇḍaveya prakāśatebhāradvājo yatra kaviryavakrīto vyanaśyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें