महाभारत 3.136.4
स पुत्रशोकादुद्विग्नस्तपस्तेपे सुदुश्चरम्भवेन्मम सुतोऽमर्त्य इति तं लब्धवांश्च सः
sa putraśokādudvignastapastepe suduścarambhavenmama suto'martya iti taṃ labdhavāṃśca saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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