महाभारत 3.136.5
तस्य प्रसादो देवैश्च कृतो न त्वमरैः समःनामर्त्यो विद्यते मर्त्यो निमित्तायुर्भविष्यति
tasya prasādo devaiśca kṛto na tvamaraiḥ samaḥnāmartyo vidyate martyo nimittāyurbhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें