महाभारत 3.136.7
भरद्वाज उवाच · bharadvāja uvāca
तस्य पुत्रस्तदा जज्ञे मेधावी क्रोधनः सदास तच्छ्रुत्वाकरोद्दर्पमृषींश्चैवावमन्यत
tasya putrastadā jajñe medhāvī krodhanaḥ sadāsa tacchrutvākaroddarpamṛṣīṃścaivāvamanyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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