महाभारत 3.136.8विकुर्वाणो मुनीनां तु चरमाणो महीमिमाम्आससाद महावीर्यं धनुषाक्षं मनीषिणम्vikurvāṇo munīnāṃ tu caramāṇo mahīmimāmāsasāda mahāvīryaṃ dhanuṣākṣaṃ manīṣiṇamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें