महाभारत 3.136.9
तस्यापचक्रे मेधावी तं शशाप स वीर्यवान्भव भस्मेति चोक्तः स न भस्म समपद्यत
tasyāpacakre medhāvī taṃ śaśāpa sa vīryavānbhava bhasmeti coktaḥ sa na bhasma samapadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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