महाभारत 3.137.13
ततस्तं समुपास्थाय कृत्या सृष्टा महात्मनाकमण्डलुं जहारास्य मोहयित्वा तु भारत
tatastaṃ samupāsthāya kṛtyā sṛṣṭā mahātmanākamaṇḍaluṃ jahārāsya mohayitvā tu bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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