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महाभारत 3.137.5
तत एकान्तमुन्नीय मज्जयामास भारतआजगाम तदा रैभ्यः स्वमाश्रममरिंदम
tata ekāntamunnīya majjayāmāsa bhārataājagāma tadā raibhyaḥ svamāśramamariṃdama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतत एकान्तमुन्नीय मज्जयामास भारतआजगाम तदा रैभ्यः स्वमाश्रममरिंदम
tata ekāntamunnīya majjayāmāsa bhārataājagāma tadā raibhyaḥ svamāśramamariṃdama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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