महाभारत 3.138.10
ब्राह्मणानां किलार्थाय ननु त्वं तप्तवांस्तपःद्विजानामनधीता वै वेदाः संप्रतिभान्त्विति
brāhmaṇānāṃ kilārthāya nanu tvaṃ taptavāṃstapaḥdvijānāmanadhītā vai vedāḥ saṃpratibhāntviti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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