महाभारत 3.140.10
कैलासः पर्वतो राजन्षड्योजनशतान्युतयत्र देवाः समायान्ति विशाला यत्र भारत
kailāsaḥ parvato rājanṣaḍyojanaśatānyutayatra devāḥ samāyānti viśālā yatra bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें