महाभारत 3.141.29
राज्ञः कुणिन्दाधिपतेः परिदाय महारथाःपद्भिरेव महावीर्या ययुः कौरवनन्दनाः
rājñaḥ kuṇindādhipateḥ paridāya mahārathāḥpadbhireva mahāvīryā yayuḥ kauravanandanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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