महाभारत 3.142.10
चरन्तमरिसंघेषु कालं क्रुद्धमिवान्तकम्प्रभिन्नमिव मातङ्गं सिंहस्कन्धं धनंजयम्
carantamarisaṃgheṣu kālaṃ kruddhamivāntakamprabhinnamiva mātaṅgaṃ siṃhaskandhaṃ dhanaṃjayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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