महाभारत 3.142.12
दुःखेन महताविष्टः स्वकृतेनानिवर्तिनाअजेयमुग्रधन्वानं तं न पश्यामि फल्गुनम्
duḥkhena mahatāviṣṭaḥ svakṛtenānivartināajeyamugradhanvānaṃ taṃ na paśyāmi phalgunam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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