महाभारत 3.142.16
सर्वेषामाश्रयोऽस्माकं रणेऽरीणां प्रमर्दिताआहर्ता सर्वरत्नानां सर्वेषां नः सुखावहः
sarveṣāmāśrayo'smākaṃ raṇe'rīṇāṃ pramarditāāhartā sarvaratnānāṃ sarveṣāṃ naḥ sukhāvahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें