महाभारत 3.142.22
ते वयं तं नरव्याघ्रं सर्वे वीर दिदृक्षवःप्रवेक्ष्यामो महाबाहो पर्वतं गन्धमादनम्
te vayaṃ taṃ naravyāghraṃ sarve vīra didṛkṣavaḥpravekṣyāmo mahābāho parvataṃ gandhamādanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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