महाभारत 3.142.7
पञ्च वर्षाण्यहं वीरं सत्यसंधं धनंजयम्यन्न पश्यामि बीभत्सुं तेन तप्ये वृकोदर
pañca varṣāṇyahaṃ vīraṃ satyasaṃdhaṃ dhanaṃjayamyanna paśyāmi bībhatsuṃ tena tapye vṛkodara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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