महाभारत 3.143.16
मन्दीभूते च पवने तस्मिन्रजसि शाम्यतिमहद्भिः पृषतैस्तूर्णं वर्षमभ्याजगाम ह
mandībhūte ca pavane tasminrajasi śāmyatimahadbhiḥ pṛṣataistūrṇaṃ varṣamabhyājagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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