महाभारत 3.143.19
वहन्त्यो वारि बहुलं फेनोडुपपरिप्लुतम्परिसस्रुर्महाशब्दाः प्रकर्षन्त्यो महीरुहान्
vahantyo vāri bahulaṃ phenoḍupapariplutamparisasrurmahāśabdāḥ prakarṣantyo mahīruhān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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