महाभारत 3.143.2
परिगृह्य द्विजश्रेष्ठाञ्श्रेष्ठाः सर्वधनुष्मताम्पाञ्चालीसहिता राजन्प्रययुर्गन्धमादनम्
parigṛhya dvijaśreṣṭhāñśreṣṭhāḥ sarvadhanuṣmatāmpāñcālīsahitā rājanprayayurgandhamādanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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