महाभारत 3.143.8
न स्म प्रज्ञायते किंचिदावृते व्योम्नि रेणुनान चापि शेकुस्ते कर्तुमन्योन्यस्याभिभाषणम्
na sma prajñāyate kiṃcidāvṛte vyomni reṇunāna cāpi śekuste kartumanyonyasyābhibhāṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें