महाभारत 3.144.5
तां पतन्तीं वरारोहां सज्जमानां लतामिवनकुलः समभिद्रुत्य परिजग्राह वीर्यवान्
tāṃ patantīṃ varārohāṃ sajjamānāṃ latāmivanakulaḥ samabhidrutya parijagrāha vīryavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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