महाभारत 3.145.30
महर्षिभिर्मोक्षपरैर्यतिभिर्नियतेन्द्रियैःब्रह्मभूतैर्महाभागैरुपेतं ब्रह्मवादिभिः
maharṣibhirmokṣaparairyatibhirniyatendriyaiḥbrahmabhūtairmahābhāgairupetaṃ brahmavādibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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