महाभारत 3.146.42अथापश्यन्महाबाहुर्गन्धमादनसानुषुसुरम्यं कदलीषण्डं बहुयोजनविस्तृतम्athāpaśyanmahābāhurgandhamādanasānuṣusuramyaṃ kadalīṣaṇḍaṃ bahuyojanavistṛtamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें