महाभारत 3.146.80
कारुण्यात्सौहृदाच्चैव वारये त्वां महाबलनातः परं त्वया शक्यं गन्तुमाश्वसिहि प्रभो
kāruṇyātsauhṛdāccaiva vāraye tvāṃ mahābalanātaḥ paraṃ tvayā śakyaṃ gantumāśvasihi prabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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