महाभारत 3.146.9
पश्य दिव्यं सुरुचिरं भीम पुष्पमनुत्तमम्गन्धसंस्थानसंपन्नं मनसो मम नन्दनम्
paśya divyaṃ suruciraṃ bhīma puṣpamanuttamamgandhasaṃsthānasaṃpannaṃ manaso mama nandanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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