महाभारत 3.147.24अहं केसरिणः क्षेत्रे वायुना जगदायुषाजातः कमलपत्राक्ष हनूमान्नाम वानरःahaṃ kesariṇaḥ kṣetre vāyunā jagadāyuṣājātaḥ kamalapatrākṣa hanūmānnāma vānaraḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें