महाभारत 3.147.26
उपतस्थुर्महावीर्या मम चामित्रकर्शनसुग्रीवेणाभवत्प्रीतिरनिलस्याग्निना यथा
upatasthurmahāvīryā mama cāmitrakarśanasugrīveṇābhavatprītiranilasyāgninā yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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