महाभारत 3.147.2
को भवान्किंनिमित्तं वा वानरं वपुराश्रितःब्राह्मणानन्तरो वर्णः क्षत्रियस्त्वानुपृच्छति
ko bhavānkiṃnimittaṃ vā vānaraṃ vapurāśritaḥbrāhmaṇānantaro varṇaḥ kṣatriyastvānupṛcchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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