महाभारत 3.149.39
निग्रहानुग्रहैः सम्यग्यदा राजा प्रवर्ततेतदा भवति लोकस्य मर्यादा सुव्यवस्थिता
nigrahānugrahaiḥ samyagyadā rājā pravartatetadā bhavati lokasya maryādā suvyavasthitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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