महाभारत 3.149.3
भ्रातुः प्रियमभीप्सन्वै चकार सुमहद्वपुःदेहस्तस्य ततोऽतीव वर्धत्यायामविस्तरैः
bhrātuḥ priyamabhīpsanvai cakāra sumahadvapuḥdehastasya tato'tīva vardhatyāyāmavistaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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