महाभारत 3.149.7
तमर्कमिव तेजोभिः सौवर्णमिव पर्वतम्प्रदीप्तमिव चाकाशं दृष्ट्वा भीमो न्यमीलयत्
tamarkamiva tejobhiḥ sauvarṇamiva parvatampradīptamiva cākāśaṃ dṛṣṭvā bhīmo nyamīlayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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