महाभारत 3.15.11
क्वासौ क्वासाविति पुनस्तत्र तत्र विधावतिमया किल रणे युद्धं काङ्क्षमाणः स सौभराट्
kvāsau kvāsāviti punastatra tatra vidhāvatimayā kila raṇe yuddhaṃ kāṅkṣamāṇaḥ sa saubharāṭ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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