महाभारत 3.15.7
ततो वृष्णिप्रवीरांस्तान्बालान्हत्वा बहूंस्तदापुरोद्यानानि सर्वाणि भेदयामास दुर्मतिः
tato vṛṣṇipravīrāṃstānbālānhatvā bahūṃstadāpurodyānāni sarvāṇi bhedayāmāsa durmatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें